स्वाईन फ्लू के विषाणु का संचरण / स्वाईन फ्लू के लक्षण

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स्वाईन फ्लू का विषाणु (H1N1 वायरस) कैसे फैलता है?


स्वाईन फ्लू का विषाणु (H1N1 वायरस) संक्रामक है और यह ठीक उसी तरह फैलता है जिस तरह मौसमी फ्लू का विषाणु फैलता है. स्वाईन फ्लू का विषाणु मुख्यतः एक संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से दूसरे व्यक्ति (जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया हो) को संक्रमित कर सकता है. इसके अलावा किसी संक्रमित सतह को छूने के बाद यदि हाँथ साफ़ किये बिना वही हाँथ आप अपने मुँह या नाक से लगा लें तो संक्रमण हो सकता है.

इस वायरस का व्यक्तियों के बीच में प्रसारण मुख्य रूप से बड़ी कण बूंदों के माध्यम से होता है (उदाहरण के लिए जब एक संक्रमित व्यक्ति एक अतिसंवेदनशील व्यक्ति के पास खांसे या छींक दे). चूंकि यह बूँदें हवा में निलंबित नहीं रह सकती, इन बड़ी कण बूंदों के जरिए संक्रमण के लिए पारेषण स्रोत और प्राप्तकर्ता व्यक्तियों का एक दुसरे से कम दूरी पर होना(<6 फीट) ही संक्रमण की सम्भावना को मजबूत करता है.

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इसके अलावा किसी भी संक्रमित व्यक्ति के सभी सांस स्राव और शारीरिक तरल पदार्थ भी समान रूप से संक्रामक हो सकते हैं.

स्वाईन फ्लू विषाणु (H1N1) के मानव में लक्षण


स्वाईन फ्लू विषाणु (H1N1) से संक्रमित हो जाने पर मानव में यह लक्षण दिखाई देते हैं

  • बुखार
  • खाँसी
  • गले में खराश
  • बहती हुई या अवरुद्ध नाक
  • शरीर में दर्द
  • सिरदर्द
  • ठंड लगना
  • थकान
  • दस्त और उल्टी (कुछ मामलों में)


बच्चों में इन लक्षणों का पाया जाना तत्काल इलाज की जरूरत की चेतावनी है

  • सांस लेने में कठिनाई
  • त्वचा के रंग में परिवर्तन
  • तरल पदार्थ के प्रति अनिच्छा
  • गंभीर या लगातार उल्टी
  • सुस्ती या थकान
  • चिड़चिड़ापन
  • फ्लू जैसे लक्षणों में सुधार पर फिर बुखार और बदतर खाँसी के साथ वापसी


वयस्कों में इन लक्षणों का पाया जाना तत्काल इलाज की जरूरत की चेतावनी है

  • सांस लेने में कठिनाई
  • सीने या पेट में दर्द या दबाव
  • अचानक चक्कर आना
  • भ्रम
  • गंभीर या लगातार उल्टी